बुधवार, 28 अप्रैल 2010

ललित मोदीः परिकथा पर विराम

यह 2004 की बात है, जब राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राज्य की क्रिकेट बिरादरी के लिए एक भव्य पार्टी दी थी. उस पार्टी में राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की कई ‘हाई-प्रोफाइल’ शख्सियतों के साथ ही ललित कुमार मोदी नामक एक सांवला, दुबला-पतला शख्स भी मौजूद था. उस पार्टी में मौजूद लोगों के मुताबिक मोदी नामक यह शख्स उस वक्त दूसरों की नजर में आने की भरसक कोशिश कर रहा था, लेकिन कई ‘हाई-प्रोफाइल’ मेहमानों की मौजूदगी के चलते उसे किसी ने भी ज्यादा तवज्जो नहीं दी.
सो, आज वे सभी व्यक्ति, जिन्होंने उस वक्त मोदी को नजरअंदाज किया था, पछता रहे हैं. 2004 की गुमनामी के दौर को पीछे छोड़ते हुए ललित मोदी आज देश के सबसे चर्चित व्यक्ति बन बैठे हैं. कुछ दिनों पहले तक क्रिकेट की दुनिया पर उनका एकछत्र राज था. मुकेश अंबानी, विजय माल्या जैसे उद्योगपति उनके साथ बैठने में गर्व महसूस करते थे, तो शाहरुख खान, प्रीति जिंटा और शिल्पा शेट्टी जैसे बाॅलीवुड सितारे भी उनके सम्मोहन में खींचे चले आते थे. क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले के मुताबिक- ‘कैरी पैकर के बाद मोदी क्रिकेट के इतिहास के सबसे ताकतवर व्यक्ति के तौर पर सामने आए हैं.’
लेकिन आईपीएल के तीसरे संस्करण में सट्टेबाजी और भ्रष्टाचार का दीमक लगने के बाद मोदी का जादू अब उतार पर है. बीसीसीआई ने मोदी के पर कतरने की पूरी तैयारी कर ली है. मुश्किलों के इस झंझावत में शरद पवार जैसे उनके कट्टर समर्थक भी दूर जा खड़े हैं. ऐसे में, यह जानना दिलचस्प रहेगा कि आखिर 2004 की गुमनामी के दौर को पीछे छोड़ते हुए मोदी देश के सबसे चर्चित व्यक्ति कैसे बन बैठे?
मोदी का यह सफर 2004 के आखिर में राजस्थान के नागपुर जिला एसोसिएशन का अध्यक्ष बनने की साधारण घटना से शुरू हुआ. तब तक मोदी क्रिकेट के गलियारों में एक गुमनाम शख्सियत थे, जिनका नाम राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष किशोर रूंगटा ने भी नहीं सुना था. रूंगटा परिवार का उस वक्त राजस्थान क्रिकेट में एकछत्र राज था. तब रूंगटा ने राजस्थान एसोसिएशन के सचिव राजेंद्रसिंह नन्दू से मोदी के बारे में पूछा, तो राजेन्द्रसिंह का जवाब था- ‘आप चिंता मत करिए, मोदी अपने ही ग्रुप का आदमी है, आगे बहुत काम आएगा.’
लेकिन, फरवरी 2005 में मोदी ने राजस्थान एसोसिएशन के चुनावों में किशोर रूंगटा को करारी शिकस्त देकर उनके चालीस साल के प्रभुत्व को जमींदोज कर दिया. इसके बाद तो मोदी ने जिस चीज को भी छुआ, सोने में तब्दील कर दिया. अपना दायरा बढ़ाते हुए उन्होंने बीसीसीआई के भीतर अपना प्रभुत्व कायम किया और बाद में उपाध्यक्ष की कुर्सी तक भी पहुंचे. लेकिन निर्विवाद रूप से, आईपीएल मोदी की जिंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी है. एक ऐसी लीग, जिसने सैकड़ों क्रिकेटरों की जिंदगी को बदल दिया.
आंकड़ों के मुताबिक आईपीएल तीन साल में ही पंद्रह हजार करोड़ रुपए के साम्राज्य में तब्दील हो गया है. लेकिन इस साम्राज्य को रचने वाले मोदी की विदाई हो चुकी है. यकीनन, मोदी ने जिस तेजी से ऊपर की छलांग लगाई, उसी तेजी से उन्हें नीचे भी धकेल दिया गया.

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