
आईपीएल का तीसरा संस्करण अपने आखिरी दौर में पहुंच चुका है. टूर्नामेंट बेहद कामयाब है, करोड़ो-अरबों रूपए भी कमाएं है और प्रसारण के नजरिए से भी वह हिट है. बावजूद इन सबके, आईपीएल के आका ललित मोदी इन दिनों खुष होने के बजाए बौराएं हुए हैं. उनकी संासे अटकी हुई है और भविष्य उन्हें अंधकारमय नजर आ रहा है. इसकी वजह आईपीएल को लेकर देष में उठ खड़ा हुआ वह विवाद है, जिसने खेल जगत के साथ ही राजनीतिक गलियारों में भी नई बहस छेड़ दी है. यह बहस आईपीएल में बेनामी पैसे की मौजूदगी को लेकर उठ खड़ा है. जाहिर है, इसकी जद में सबसे पहले ललित मोदी को हीे आना था. सो, अब उन पर षिकंजा कसने की तैयारियां की जा रही है. इसके चलते आईपीएल के भव्य समापन पर ध्यान देने के बजाए अब मोदी खूद को बचाने की कोषिषों में जुट गए हैं. हालांकि वे अब भी दावें कर रहे हैं कि आईपीएल में उनके पद को लेकर कोई विवाद नहीं है. लेकिन अंदर की बात तो यहीे है कि आईपीएल के कमिष्नर मोदी को अपना सिंहासन डोलता नजर आ रहा है.
सवाल मोदी का नहीं है, बल्कि खेल में दाखिल हो चुके भ्रष्टाचार का है. यह सारा मामला सुर्खियों में तब आया, जब यूपीए सरकार के विदेष राज्यमंत्री शषि थरूर की एक करीबी महिला मित्र के आईपीएल में पैसा लगाने की बात सामने आई. सुनंदा पुष्कर नामक इस महिला के आईपीएल में नई टीम के तौर पर सामने आई कोच्चि में 60 करोड़ से भी ज्यादा के शेयर होने की बात सामने आई. दक्षिण अफीका में रह रही कष्मीरी मूल की इस महिला के साथ थरूर के शादी करने की बातें कही जा रही थी,, जिसके चलते ही मामलें ने इस कदर तूल पकड़ा.
अब थरूर इस विवाद के चलते यूपीए सरकार में अपनी नौकरी गंवा चुके हैं और आयकर विभाग ने ललित मोदी पर भी षिकंजा कस दिया है. लेकिन अभी भी कईं सवाल ऐसे है, जिनके जवाब सामने आने चाहिए.
सबसे पहले तो आईपीएल को पूरी तरह से पारदर्षित किया जाना चाहिए. वर्तमान में आईपीएल की आठ टीमों में मुकेष अंबानी,, विजय माल्या, रेड्डी बंधुओं सहित देष की कई चर्चित और अमीर शख्सियतों का पैसा लगा है. लेकिन इन टीमों में कई गुमनाम शेयरधारकों का भी पैसा लगा है. सबसे पहले इन सभी की सच्चाई सार्वजनिक की जानी चाहिए. बताया जा रहा है कि ललित मोदी के कईं रिष्तेदारों ने भी राजस्थान रायल्स और पंजाब की टीमों में पैसा लगाया है. तो फिर जांच होनी चाहिए कि क्या इन लोगों को मोदी का रिष्तेदार होने का फायदा तो नहीं मिला है. आरोप यह भी उठ रहे हैं कि मोदी ने आईपीएल के मैच फिक्स कराके करोड़ों रूपए के वारे-न्यारे कर लिए हैं. अगर ऐसा है तो सबसे पहले मोदी पर षिकंजा कसना चाहिए.
एक अनुमान के मुताबिक आईपीएल अपने तीसरे ही साल में पंद्रह हजार करोड़ रूपए के साम्रााज्य में तब्दील हो गया है. एक अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका के मुताबिक आईपीएल दुनिया का सबसे ज्यादा फलने-फूलने वाला खेल संस्थान बन गया है. तो फिर ऐसे में चिंता और ज्यादा बढ़ जाती है. कहीं यह बेनामी पैसे के बल पर तो नहीं है. जाहिर है, सबसे पहले इन सवालों के जवाबों का पता लगाए जाने की जरूरत है.
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